
क्रिया किसे कहते हैं?
ऐसे शब्द जिनसे किसी कार्य के करने, होने या किसी स्थिति का बोध होता है उन्हें क्रिया कहा जाता है, हिंदी व्याकरण में कोई भी वाक्य क्रिया के बिना पूरा नही होता, अत: हिंदी व्याकरण में क्रिया का महत्वपूर्ण स्थान होता है, हम आपको क्रिया के कुछ उदाहरण बता रहे है जो की निम्न प्रकार से है.
- श्याम पुष्तक पढ़ रहा है (कार्य का होना)
- सूरज उग रहा है (प्राकृतिक घटना)
- राजू को जुखाम है (स्थिति का बोध)
धातु क्या है
क्रिया के मूल रूप को धातु कहा जाता है, अर्थात क्रिया के सभी रूप धातु से ही निर्मित होते है, जब धातु के अंत में ‘ना’ प्रत्यय जोड़ा जाता है तो वो क्रिया में परिवर्तित हो जाता है, हम आपको धातु और क्रिया के संबंध को बेहतर ढंग से समझने के लिए कुछ उदाहरण बता रहे है जो निम्न प्रकार से है.
| धातु | क्रिया | चित्र |
| पढ़ | पढना | ![]() |
| लिख | लिखना | ![]() |
| चल | चलना | ![]() |
| नाच | नाचना | ![]() |
| देख | देखना | ![]() |
क्रिया के कितने भेद होते है
क्रिया को मुख्य रूप से 3 भागो में वर्गीकृत किया गया है, पहला कर्म के आधार पर, दुसरा रचना के आधार पर और तीसरा काल के आधार पर
(क.) कर्म के आधार पर क्रिया के भेद
कर्म की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर क्रिया को दो अलग अलग भागो में बांटा जाता है, पहला सकर्मक क्रिया और दुसरा अकर्मक क्रिया.
1. सकर्मक क्रिया
ऐसा वाक्य जिसमे काम करने का असर कर्ता (काम करने वाले पर) न पडकर किसी चीज या वस्तु पर पड़ता है उसे सकर्मक क्रिया कहा जाता है, ‘रामू किताब पढ़ रहा है’ इसमें पढने का असर रामू पर न पड़कर सीधा किताब पर पड़ रहा है इसलिए यह एक सकर्मक क्रिया है. सकर्मक क्रिया के दो उपभेद होते है पहला एककर्मक और दुसरा द्विकर्मक.
- एककर्मक क्रिया – ऐसी क्रिया जिसके साथ केवल एक ही कर्म जुडा हो उसे एककर्मक क्रिया कहा जाता है, जैसे – राम दूध पीता है.
- द्विकर्मक क्रिया – ऐसी क्रिया जिसके साथ दो कर्म जुड़े हो उसे द्विकर्मक क्रिया कहा जाता है जैसे – अध्यापक ने छात्रो को हिंदी पढ़ाई.
2. अकर्मक क्रिया
ऐसे वाक्य जिसमे काम करने वाले (कर्ता) को किसी वस्तु या कर्म की ज़रूरत नहीं होती और काम का सीधा असर कर्ता पर ही पड़ता है, उसे अकर्मक क्रिया कहा जाता है. इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए हम आपको कुछ उदाहरण बता रहे है जो निम्न प्रकार से है.
- राजू हंसता है. (हंसने का असर सीधे राजू पर है)
- पक्षी उड़ते हैं. (उड़ने की क्रिया सीधे पक्षी कर रहे हैं)
सरल पहचान – किसी भी वाक्य में क्रिया से पहले ‘क्या’ या ‘किसको’ लगाकर प्रश्न करें, इसके बाद यदि उत्तर में कोई व्यक्ति या वस्तु प्राप्त होती है तो वह सकर्मक क्रिया है एवं यदि उत्तर प्राप्त न हो या उत्तर में केवल क्रिया मिले तो वह अकर्मक क्रिया है.
(ख.) रचना या संरचना के आधार पर क्रिया के भेद
वाक्य में रचना, प्रयोग और बनावट के आधार पर क्रिया में निम्नलिखित भेद होते है जैसे –
- प्रेरणार्थक क्रिया – जब कर्ता स्वयं कार्य नहीं करता एवं वह किसी अन्य को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहा जाता है जैसे – राम श्याम से पानी भरवाता है.
- संयुक्त क्रिया – दो या दो से अधिक भिन्नार्थक क्रियाओं से मिलकर बनने वाली क्रिया को संयुक्त क्रिया कहा जाता है जैसे – वह पढ़ाई कर चुका है.
- पूर्वकालिक क्रिया – किसी भी मुख्य क्रिया से पहले संपन्न होने वाली क्रिया को पूर्वकालिक क्रिया कहा जाता है जैसे – वह विधालय जाकर पढाई करेगा.
- नामधातु क्रिया – ऐसी क्रिया जिसे संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के शब्दों में प्रत्यय जोडकर बनाया जाता है उसे नामधातु क्रिया कहा जाता है जैसे – दो मित्र आपस में बतिया रहे हैं.
- कृदंत क्रिया – ऐसी क्रिया जिसे मूल धातु में प्रत्यय लगाकर बनाया जाता है उसे कृदंत क्रिया कहा जाता है. जैसे चल + ता = चलता, लिख + कर = लिखकर
- सामान्य क्रिया – ऐसे वाक्य जिसमे केवल एक ही क्रिया का प्रयोग होता है उसे सामान्य क्रिया कहा जाता है. जैसे – राम आया, वो पढ़ा. उसने देखा
- सहायक क्रिया – किसी वाक्य में मुख्य क्रिया के अर्थ को स्पष्ट और पूर्ण करने में सहायता करने वाली क्रिया को सहायक क्रिया कहा जाता है जैसे – वह पढ़ाई कर रहा है.
(ग.) काल के आधार पर क्रिया के भेद
काल या समय के अनुसार क्रिया के कुल तीन भेद होते है, पहला भुतकालिन क्रिया, दूसरा वर्त्तमानकालिन क्रिया और तीसरा भविष्यकालिन क्रिया.
- भुतकालिन क्रिया – ऐसी क्रिया जिसमे किसी कार्य के बीते हुए समय में पूरा होने का बोध होता है उसे भुतकालिन क्रिया कहा जाता है जैसे – राम पढाई कर रहा था.
- वर्त्तमानकालिन क्रिया – ऐसी क्रिया जिसमे किसी कार्य के वर्त्तमान समय में निरंतर होने का बोध होता है उसे वर्त्तमानकालिन क्रिया कहा जाता है जैसे – राम पढ़ाई कर रहा है.
- भविष्यकालिन क्रिया – ऐसी क्रिया जिसमे आने वाले समय में किसी कार्य के संपन्न होने के संकेत मिले उसे भविष्यकालिन क्रिया कहा जाता है जैसे – सीता कल खीर बनाएगी.
क्रिया के रूप में परिवर्तन
क्रिया एक ‘विकारी शब्द’ है, इसका सीधा और सरल मतलब है कि स्थिति बदलते ही क्रिया का रूप (लिंग, वचन, समय) बदल जाता है, इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए हम आपको कुछ उदहारण बता रहे है जो निम्न प्रकार से है.
(क) लिंग बदलने पर
- पुल्लिंग: लड़का गाता है.
- स्त्रीलिंग: लड़की गाती है.
यहाँ पर लिंग बदलते ही ‘गाता’ शब्द ‘गाती’ है शब्द में परिवर्तित हो गया.
(ख) वचन बदलने पर
- एकवचन: बच्चा खेलता है.
- बहुवचन: बच्चे खेलते हैं.
जैसे ही वचन में परिवर्तन हुआ तो ‘खेलता’ शब्द ‘खेलते’ शब्द में परिवर्तित हो गया.
(ग) पुरुष बदलने पर
- उत्तम पुरुष: मैं जाता हूँ।
- मध्यम पुरुष: तुम जाते हो।
- अन्य पुरुष: वह जाता है।
वाक्य में क्रिया का महत्व क्या है
क्रिया को वाक्य का केन्द्रित तत्व माना जाता है, अर्थात क्रिया के बिना कोई भी विचार पूर्ण रूप से व्यक्त करना असंभव होता है, क्रिया किसी भी वाक्य को पूर्ण करने में, घटना काल निर्धारित करने में एवं भाव और स्थिति को प्रकट करने का कार्य करती है.
मुख्य रूप से कर्म के आधार पर क्रिया दो प्रकार की होती है पहली सकर्मक क्रिया और दूसरी अकर्मक क्रिया.
अकर्मक क्रिया में क्रिया का प्रभाव सीधे कर्ता पर पड़ता है, जबकि सकर्मक क्रिया में क्रिया का प्रभाव कर्ता के बजाय कर्म पर पड़ता है.
क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं. जैसे – ‘पढ़ना’ क्रिया में ‘पढ़’ धातु है और ‘लिखना’ क्रिया में ‘लिख’ धातु है.
मुख्य क्रिया की सहायता करने वाले शब्दों को सहायक क्रिया कहते हैं, जो समय या काल का बोध कराते हैं. जैसे – “वह जा रहा है” में ‘रहा है’ सहायक क्रिया है.
जब दो या दो से अधिक क्रियाएं मिलकर किसी एक पूर्ण कार्य को दर्शाती हैं, तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं. जैसे – “वह पढ़ने लगा” या “तुम घर चले जाओ”
इस लेख में हमने क्रिया किसे कहते हैं इसके बारे में जानकारी प्रदान की है, अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करें एवं अगर आपके मन में इससे जुडा किसी भी प्रकार का सवाल है तो आप हमे कमेंट करके भी बता सकते है.





